राजस्थान लोक संगीत Notes – Arts and Culture

लोक संगीत का मूल आधार

  • लोक संगीत का मूल आधार लोक-गीत हैं।
  • राजस्थान में लोकगीत विभिन्न अवसरों पर सामूहिक रूप से गाए जाते हैं।
  • प्रचलित शैलियाँ: मांड, तालबंदी, लंगा, मांगणियार।

लोकगीतों का वर्गीकरण

  • जन-साधारण के गीत
  • देवी-देवताओं के गीत
  • व्यावसायिक जातियों के गीत
  • मरू प्रदेशीय गीत
  • पर्वतीय क्षेत्र के गीत
  • मैदानी क्षेत्र के गीत

लोकगीतों का महत्व

  • देवेन्द्र सत्यार्थी: लोकगीत किसी संस्कृति के मुँह बोलते चित्र हैं।
  • महात्मा गाँधी:
    • लोकगीत जनता की भाषा है।
    • लोकगीत हमारी संस्कृति के पहरेदार हैं।
    • लोकगीतों में पर्वत, नदियाँ, धरती, फसलें गाती हैं।
  • रवीन्द्रनाथ टैगोर: लोकगीत संस्कृति का सुखद संदेश ले जाने वाली कला है।
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल: संस्कृति लोकगीतों के कंधों पर चढ़कर आती है।
लोकगीतों का महत्व

विवाह से संबंधित लोक गीत

विवाह समारोह में गाए जाने वाले प्रमुख गीत:

  • बधवा, चाकभात, रातिजगा, मायरा, हल्दी, घोड़ी, बन्ना-बन्नी।
  • घोड़ी/घोड़लियाँ: वर की घुड़चढ़ी रस्म के समय।
  • पावणा: दामाद के ससुराल आने या भोजन करते समय।
  • जला/जलो जलाल: बारात के डेरा देखने के दौरान।
  • कामण: जादू-टोने से बचाने वाले गीत।
  • सीठणें: दामाद या मेहमानों को भोजन के समय गाली गीत।

राजस्थान लोक गीत – Study Notes

विरह के गीत

  • कुरजां: पक्षी के माध्यम से संदेश।
  • झोरावा: पति के वियोग में।
  • सुवटिया: तोते से संदेश भेजना।
  • पीपली: वर्षा ऋतु में गाया जाता है।

विवाह से जुड़े लोक गीत

  • दुपट्टा: दुल्हन की सखियाँ गाती हैं।
  • चाक गीत: चाक पूजने के समय।
  • परणेत गीत: विवाह में गाया जाता है।
  • कुकड़लू: तोरण पर गाया जाता है।
  • तोरणियो: दूल्हे के प्रवेश पर।
  • पीठी: उबटन लगाते समय।
  • बिंदोला: वर के आमंत्रण पर।
  • माहेरा/भात: भात भरते समय।
  • झूलरिया: भात के दौरान।
  • कोयल/कोयलड़ी: विदाई गीत।
  • अरणी गीत: बेटी की विदाई।

दूल्हे की प्रशंसा और मेहमानों का स्वागत

  • मोरिया थाई रे थाई: दूल्हे की प्रशंसा।
  • फलसड़ा: मेहमानों के स्वागत में।
  • खम्मा गीत: दूल्हे की प्रशंसा।
  • बरसो गीत: दूल्हे को आशीर्वाद।

क्षेत्र विशेष में प्रचलित लोक गीत

  • मूमल: जैसलमेर का श्रृंगारिक गीत, मूमल और महेन्द्र की कहानी।
  • ढोला-मारू: सिरोही का प्रेम गीत, ढोला और मारू की कथा।
  • रसिया: भरतपुर व धौलपुर क्षेत्र का होली गीत।
  • हमसीढो: उत्तरी मेवाड़ के भीलों का समूह गायन।

विरह और प्रेम गीत

  • पपैहा: प्रेमिका का प्रेम प्रस्ताव जिसे नायक अस्वीकार करता है।
  • पणिहारी: पानी भरते समय स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत।
  • हिचकी: किसी की याद आने पर गाया जाने वाला मेवात का गीत।
  • लावणी: नायक द्वारा नायिका को लोकगीत में बुलाना।
  • सुपना: स्वप्न में मिले संदेश पर आधारित गीत।
  • कागा: प्रिय की प्रतीक्षा में कौए को संदेश देना।
  • चिरमी: चिरमी पौधे के माध्यम से भाई और पिता को याद करना।
  • ओल्यू/ओळू: विदाई या प्रियजन की याद में गाया जाने वाला गीत।
  • बारहमासा: बारह महीनों की प्रकृति और विरह का गीत।
  • डुंगरिया: भाई से मायके लौटने की प्रार्थना।
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